रामायण की सीख | छोटी-छोटी समस्‍या से ना घबराये।

रामायण की सीख

आज के भागदौड़ के जिन्‍दगी में हम लोग बहुत जल्‍दी  ही हिम्‍मत हार जाते हैं। बहुत हतास हो जाते है, कभी कभी लगता है कि हिम्‍मत पुरी तरह से टूट चुका हैं  और हमें आगे का रास्‍ता नहीं समझ नहीं आ रहा होता है तो हम अपने लक्ष्‍य से भटक जाते हैं। हम जल्‍द ही हतास हो कर अपने  कार्य को छोड़ देते है उस समय रामायण की सीख  से बहुत कुछ अमल कर सकते है जिससे हमारा जीवन का मार्ग आसान हो जायेगा।

उस समय यदि हमे कोई भी Idea मिल जाये तो हम आगे बढ़ सकते हैं या हमारा उस Time कोई मार्गदर्षण करता है तब जा कर हमारा मनोबल ऊँचा हो जाता है।

     हम अकसर ऐसा सोचते हैं कि ये problem  हमारे साथ ही क्‍यों होती है तो चलिए  हम आपको बताते हैं ऐसा आपका सोचना सही है But आपके साथ-साथ हर ईसान के Life में Problem आती जाती रहती हैं यहाँ तक की भगवान राम के साथ भी Problem आई ,  ऐसा राम‍चरित्रमानस में लिखा गया हैं ।

   आज मैं  रामायण से आपको एक ऐसा प्रसंग बताने वाला हुँ । जिससे आप अपने Problem में होने के बाद भी आपकी हिम्‍मत बनी रहेगी और आप Problem पर ध्‍यान ना दे कर Solution के बारे में सोचेगें ।

रामायण की सीख ये है की Life में Problem आना जरुरी हैं, ये Problem ही हमें Strong बनाते है यदि किसी के Life में Problem नहीं आ रही है तो वो ईसान कुछ अपने Life में बड़ा लक्ष्‍य पाने कि चाह नहीं रखता हैं।

चलिए सुरू करते हैं रामायण का प्रसंग :

   बात उस समय कि है जब राम 14 वर्ष का वनवास काटने के लिए जंगल में जाते हैं उनके साथ लक्षण और सीता भी साथ जाती है। राम, लक्ष्‍मन और सीता वनवास का जीवन जंगल में ही बिताते है ।

ramayan gyan in hindi

   13 वर्ष बीत जाने के बाद एक ऐसा समय आता हैं जब रावण ने माया जाल बिछा कर सीता जी का हरण कर लेते है ये कहानी आप सभी को पता होगा की कैसे सीता का हरण रावण छल से कर लेता हैं , जिन्‍हें ये Story नहीं पता है मैं उसे बताना चहुँगा।

सीता जी जब फुल लेने के लिए वाटिका में जाती है।

रामायण की सीख 2

वहाँ पर सीता जी को एक सोने का हिरण दिखाई देता है। हिरण इतना सुन्‍दर होता हैं कि सीता जी को बहुत ही अदुतिय लगता है , और सीता जी सोचने लगती है क्‍यों ना पकरा जाय और कुटिया में अपने पास रखें।

ऐसा मन में विचार रख कर राम जी को कहती है:- हे नाथ हमने एक सोने का हिरण पुष्‍प वाटिका में देखा है जो बहुत ही मन मोहक हैं।

मैं उसे अपने पास रखना चाहती हुँ । बाद में मैं उसे अयोध्‍या ले कर जाऊगी जिसे माता और गुरुजन हिरण को देख कर बहुत ही प्रशन होंगें।

ऐसा बात राम जी सुन कर, सीता जी के मन की इच्‍छा  के पुर्ति के लिए राम जी हिनण के पीछे नीकल पड़ते हैं।

रामायण की सीख 3

मैं आपको बता दुँ ये रावण का ही माया जाल थी । रावण के मामा ने ही हिरण के भेष धारण किया हुआ था

राम जी हिरण का पीछा करते करते बहुत दूर जंगल में निकल गये । तब रावण ने ऐसी माया रची जिसमें सीता जी के कहने पर राम के मदद के लिए लक्ष्‍मन जी को भी जंगल में जाना पड़ा ।

इतनी ही देर में ही रावण ने श्रृषि मुनि का भेष धारण करके, सीता जी का हरण कर लेते है और रावण पुष्‍पक विमान से सीता जी को लंका ले जाते हैं ।

दोस्‍तों जब सीता जी का हरण हो जाता है तब राम , लक्ष्‍मण  दोनो भाई सीता जी के खोज में नीकलते है, उस मार्ग में सुग्रीव जी से मित्रता होती है ।

रामायण की सीख 4

बात उस समय की है जब राम जी और लक्ष्‍मण जी का युद्ध मेघनाथ से होता हैं और मेघनाथ का एक वाण दोनों भाईयों को नाग पास में बांध देता हैं ।

जिससे दोनों भाई मुर्छित हो जाते हैं । जब दोनों भाई मुर्छित हो जाते हैं तो सारे मंत्री गण सोक मनाने लगते हैं और चिंतीत हो जाते है कि अब क्‍या किया जाय। सुग्रीव , जामवंत जी, अंगद जी, नल नील और वानर सेना सोक में डुब जाती है ।

 मैं आपको बताना चाहता हुँ सारे लोग राम और लक्ष्‍मण को ले कर चिंतित थे But कोई भी ये नहीं ये सोच रहा था कि इन भाईयों को कैसे बचाया जाय। नाग पास की मुक्ति के बारे में कोई भी विचार नहीं कर रहा था।

हमें रामायण की सीख प्रसंग से ये सिखने को मिलता है जब भी कोई समस्‍या आये तों समस्‍या पर विचार ना करके उसके Solution के बारे में सोचना चाहिए ।

आपको जान कर हैरानी होगी उन सबो के बीच हनुमान जी नहीं थे । उनको जब युद्ध भुमि में पता चला कि राम और लक्ष्‍मण दोनों भाईयों को नाग पास ने बांध लिया है तब ही वो Directly इनके मुक्ति के लिए उपाय ढुढने निकल परे ।

हनुमान जी ने एक छन कि देरी किये बिना पंछी राज गरुर जी को बुला कर लाये और दोनों भाईयों को नाग पास के बंधन से मुक्‍त कर दियें ।

हमें हनुमान जी से सीख लेनी चाहिए

रामायण की सीख5

 

जब Problem आ ही गया है तो उस पर विचार करके अपना समय बर्वाद ना करे ।

उस Problem से कैसे निकला जाये, उस पर विचार करना चाहिए।  ऐसा नहीं कि राम जी के मंत्री गन की तरह Problem का रोना रोने लगें और अपना समय बर्वाद करें।

 मै कहना चाहता हुँ जो Problem आना था वो तो आ ही गया , समस्‍या को ले कर क्‍यों चिंतित हों। जो बीत गया है उस पर सोच कर  अपना समय क्‍यों खराब करें । उस Problem के Solution के बारे में सोचे यदि आप Solution पर सोचे तो आपको 100% कोई ना कोई उपाय मिल ही जायेगा।

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 रामायण की सीख

दुसरी हम इस प्रसंग से ले सकते हैं कि:-

जब लक्ष्‍मण जी का युद्ध मेघनाथ से हो रहा था तब मेघनाथ ने एक ऐसा शब्‍द-भेदी वाण लक्ष्‍मण जी पर छोड़ दिया जिससे लक्ष्‍मण जी मुर्छित होकर वहीं पर गिर गयें ।

राम जी को जब पता चला कि उनका भाई लक्ष्‍मण युद्ध भुमि में मुर्छित हो गये है तब राम जी बहुत टुट जाते हैं। राम जी लक्ष्‍मण जी के पास जा कर बहुत विलाप करते हैं और उनके आँख से आसुयों का धारा बहने लगता हैं।

राम जी बहुत ही दुखी हो जाते हैं और सोचने लगते हैं कि मैं माता को क्‍या जवाब दुंगा । मैंने माता से वादा किया था कि लक्ष्‍मण को कुछ नहीं होने दुंगा उसका ख्‍याल रखुगाँ जबकि लक्ष्‍मण अब जिन्‍दा नहीं रहें ऐसा सब बाते सोच कर राम जी बहुत ही निराश हो चुके थे।

और राम जी यहाँ तक साचने लगते हैं जब लक्ष्‍मण नहीं रहा तो मैं भी अपना प्राण त्‍याग दुँगा । यदि मेरा भाई ही नहीं रहा तो युद्ध जीत कर क्‍या करुगाँ ।

मै आपको बताना चाहता हुँ रामजी बहुत टुट चुके होते है उन्‍हें कुछ समझ में नहीं आ रहा होता है इस समय क्‍या करना चाहिए। रामजी को कोई भी उपाय नहीं आ रहा था क्‍योंकि रामजी Solution के बारे में नहीं सोच रहे थे बल्कि वो चिंतित ज्‍यादा हो रहे थे।

तब विभिषण जी ने उपाय बताया और हनुमान जी के संजीविनी बुटी लाने पर लक्ष्‍मण जी का प्राण लौट आता है ।

मैं यहाँ पर आपको ये बताना चाहता हुँ रामजी के पास भी problem  आई थी उनका लक्ष्‍य था सीता का आजाद करवाना । फिर भी उस मार्ग पर चलने में समस्‍या आई और उन्‍होने हर समस्‍या को Solve करके आगे बढ़ गये But रुके नहीं। अंत में रावण का वध कर सीता को मुक्‍त कर करते  है।

Ramayana seekh

दोस्‍तों रामायण की सीख से हमे ये समझ लेना चाहिए -जब भगवान राम के लक्ष्‍य के रास्‍ते में समस्‍या आ सकती है  तो हमारे लक्ष्‍य के रास्‍ते में क्‍यों नहीं आयेगी।

दोस्‍तों आपको समझना होगा ”Problem हमारी समस्‍या नहीं है ज‍बकि Problem का Solution निकालना ही सबसे बड़ा समस्‍या हैं जब Problem का Solution निकल जायगा तब कोई समस्‍या नहीं रहेगी ।”

हम ऐसा सोचते है कि ये Problem हमें कमजोर कर देगी जबकि ये समस्‍या हमें Strong  करने के लिए आती है । जिससे हम मजबुत होते है और हमरी Internal Part Strong हो जाती है ।

रामायण की सीख हमें बताती है:- छोटी छोटी समस्‍या को लेकर परेशान नहीं होना हैं और उस बाधा से सीख करआगे बढ़ना है।

क्‍योंकि इन कठिनाइयों के बाद ही हमें सफलता मिलती हैं।

दोस्‍तों ये लेख आपको बहुत ही अच्‍छी लगी होगी। आप इस लेख (रामायण की सीख) को अपने दोस्‍तों और परिवार वालों के साथ Social Media पर Share करें। जिससे उनको भी इस प्रसंग से सीखने को मिलें…धन्‍यवाद!

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