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22yr old Dron Young Scientist NM Pratap | बना दिया 600 ड्रोन

22 साल के प्रताप ने ई-कबाड़ से बना दिया 600 ड्रोन, दुनिया में किया भारत का नाम रौशन!
Dron Young Scientist NM Pratap

सफल होने के लिए जिद्दी होना होगा !

Dron Young Scientist NM PratapDron Young Scientist NM Pratap  , India’s Dron boy

Dron Young Scientist NM Pratap : यह तस्वीर है कर्नाटक के छोटे से गाँव कादिकुडी (मैसूर) के एक गरीब किसान परिवार में पैदा हुये NM Pratap की।

इस 21 वर्षीय वैज्ञानिक ने फ्रांस से प्रतिमाह 16 लाख की तनख्वाह, 5 BHK फ्लैट और 2.5 करोड़ की कार का ऑफर ठुकरा दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्हें DRDO में नियुक्त किया है

भारत में नई सोच और नई तक‍नीकियों  पर खोज करने वाले लोगों की कमी नहीं हैं। ऐसे ही प्रतिभावन है कर्नाटक के NM Pratap जिन्‍होंने अपनी सूझबूझ और नई तकनीक से भारत को 600 ड्रोन दिया।

यूं तो हमने हमेशा Inspirational और Struggle से भरी कहारियां सुनी हैं। लेकिन NM Pratap ने तकनीकी उन्‍नति के राह में कई बाधाओं से झुझते हुए कम सुविधा तथा कम पैसे में नये अविष्‍कार को नया आायाम दिया।

प्रताप एक गरीब किसान परिवार से हैं। NM Pratap का जन्‍म कर्नाटक के पास एक दूर-दराज गांव कादिकुडी में हुआ। उनके पिता एक किसान थे, जिसकी Monthly Income 2000 रुपये थी।

प्रताप बचपन से ही पढ़ने में काफी होशियार थे और इन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स में काफी दिलचस्पी थी। प्रताप इंजीनियरिंग करना चाहते थे, लेकिन पैसे नहीं थे और घर की तंगी की वजह से उनकी पढ़ाई अधुरी रह गई।

इसके बाद जैसे तैसे B.Sc में एडमिशन लिया, पर उसे भी पैसों की वजह से पूरा नहीं कर पाये। हॉस्‍टल की फीस नहीं भरने के कारण उन्‍हें हॉस्‍टल से भी बाहर निकाल दिया गया।

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इस हालात से मजबूर होकर प्रताप को सरकारी बस स्‍टैंड को ही अपना घर बनाना पड़ा और बस स्टैंड पर रहने सोने लगे, कपड़े वहीं के पब्लिक टॉयलेट में धोते रहे। हालत ये हो गई की गरीबी ने उन्‍हें रात और दिन सड़क पर बिताने के लिए मजबूर कर दिया।

फिर भी प्रताप ने हिम्‍मत नहीं हारी। सच ही कहा गया  हैं संघर्ष के बिना सफलता नहीं मिलती

इसके बाद प्रताप ने ठान ली जैसे भी हो अपने दम पर Computer का Knowledge प्राप्‍त करके ही रहेंगे।

तब उन्‍होने इंटरनेट की मदद से Computer Language जैसे C, C++, java, Python सब सीखा और eWaste के माध्‍यम से ड्रोन के बारे में जाना।

प्रताप को Computer Language का ज्ञान होने के बाद ये महसूस हुआ की उन्‍हें Cyber Cafe की जरुरत है, मगर पैसे के तंगी की वजह से वो इसे पूरा नहीं कर सकते थे।

तब उन्‍होंने Cyber Cafe में साफ-सफाई का काम शुरू कर दिया और इसके बदले उन्‍होंने पैसे नहीं लिए बल्कि 45 मिनट तक Internet use करने की मोहलत मांगी।

प्रताप ने सारी जानकारी हासिल करने के बाद ड्रोन बनाने के लिए अपने दिमाग में एक विचार तैयार किया।

पैसा ना होने के कारण प्रताप ने इलेक्ट्रोनिक्स कचरे जैसे की टूटे हूए ड्रोन, मोटर और इलेक्‍ट्रॉनिक चीजो से ड्रोन बनाना शुरू कर दिया।

कई बार असफल होने के बाद प्रताप एक दिन ड्रोन बनाने में कामयाब रहे जो उड़ भी सकता था और साथ ही फोटो भी खींच सकता था।

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14 साल की उम्र में पहली बार प्रताप की जान पहचान ड्रोन से हुई थी। इसके बाद उन्होंने ड्रोन चलाने से लेकर उसे खोलना और रिपेयरिंग का काम भी शुरू कर दिया। 16 साल की उम्र में प्रताप ने ऐसा ड्रोन बनाया जो उड़ सकता था और फोटोज ले सकता था।

Dron Young Scientist NM PratapDron Young Scientist NM Pratap

दुनिया भर के वैज्ञानिकों को अपनी टूटी-फूटी अंग्रेजी में मेल भेजते रहते थे कि मैं आपसे सीखना चाहता हूँ। पर कोई जवाब सामने से नहीं आता था।

कर्नाटक बाढ़ के दौरान प्रताप के ड्रोन्स ने राहत कार्यों में लगे लोगों का बखूबी साथ दिया। प्रताप आइआइटी बॉम्बे और आइआइएससी में लेक्चर दे चुके हैं।

Dron Young Scientist NM Pratap 3Dron Young Scientist NM Pratap

जब उन्‍होंने ड्रोन तैयार कर लिया तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा तथा उन्‍होंने दुनिया को दिखाने के लिए ड्रोन मॉडल प्रतियोगिता में भाग लिया और Unreserved compartment में बैठ IIT Delhi पहुंचे।

उस ड्रोन को लेकर वह IIT Delhi में हो रहे एक प्रतिस्पर्धा में भाग लिया और वहाँ जाकर “द्वितीय पुरस्कार” प्राप्त किया।

Dron Young Scientist NM Pratap 2Dron Young Scientist NM Pratap

उसी दौरान जापान की एक कंपनी वहां आई थी और वहां उन्हें किसी ने जापान में होने वाले ड्रोन कॉम्पटीशन में भाग लेने को कहा।

प्रताप को जापान जाने के लिये 60,000 रुपयों की जरूरत थी। जिसके लिए उन्‍हें काफी ज्‍यादा कोशिश करनी पड़ी और रिश्‍तेदारों के सामने हाथ भी फैलाने पड़े।

मगर किसी ने भी मदद नहीं की। फिर एक मैसूर के ही भले इंसान ने उनके Flight Ticket को Sponsored की।

बाकी के पैसो के लिए प्रताप ने अपनी माता जी की सुहाग की निशानी मंगलसूत्र बेचकर जुटाना पड़ा था, हालांकि मंगलसूत्र बेचने के दौरान प्रताप का मन काफी व्‍याकुल हो रहा था। मगर उनके पास कोई और चारा भी नहीं था।

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जब जापान पहुंचे तो सिर्फ 1400 रुपये बचे थे। इसलिये जिस स्थान तक उन्हें जाना था उसके लिये बुलेट ट्रेन ना लेकर General Train पकड़ी और उन्‍हें 16 स्टॉप पर ट्रेन बदली। उसके बाद सामान के साथ 8 किलोमीटर पैदल चलकर हॉल तक पहुंचे। ये प्रताप का जिद्द हि था जो यहां तक ले कर आया।

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प्रतिस्पर्घा स्थल पर 127 देशों से लोग भाग लेने आये हुये थे। बड़ी-बड़ी युनिवर्सिटी के बच्चे भाग ले रहे थे। नतीजे घोषित हुये। ग्रेड अनुसार नतीजे बताये जा रहे थे।

 प्रताप का नाम किसी ग्रेड में नहीं आया।

वह निराश हो गये।

अंत में Top 10 की घोषणा होने लगी। प्रताप वहाँ से जाने की तैयारी कर रहे थे।

10वें नंबर के विजेता की घोषणा हुई …

9वें नंबर की हुई …

8वें नंबर की हुई …

7..6..5..4..3..2 और पहला पुरस्कार मिला हमारे India के प्रताप को।

अमेरिकी झंडा जो सदैव वहाँ ऊपर रहता था वह थोड़ा नीचे आया और सबसे ऊपर तिरंगा लहराने लगा। प्रताप की आँखें आँसू से भर गयीं और वह रोने लगे।

उनकी काबिलियत को देखते हुए Gold और Silver medal से सम्‍मानित भी किया गया। उन्हें 10 हजार डॉलर (सात लाख से ज्यादा) का पुरस्कार मिला।

वहीं 2018 में हुए International Drone Expo में Albert Einstein Innovation Gold Medal जीत कर भारत का नाम रौशन किया।

मोदी जी की जानकारी में प्रताप की यह उपलब्धि आयी। उन्होंने प्रताप को मिलने बुलाया तथा पुरस्कृत किया।

 उनके राज्य में भी सम्मानित किया गया। 600 से ज्यादा ड्रोन्स बना चुके हैं।

मोदी जी ने DRDO से बात करके प्रताप को DRDO में नियुक्ति दिलवाई। आज प्रताप DRDO के एक ड्रोन वैज्ञानिक हैं। फिलहाल प्रताप DRDEO के एक प्रोजेक्‍ट में काम कर रहे हैं।

इसलिये हीरो वह है, जो जीरो से निकला हो। प्रताप जैसा लड़का लोगों के लिए प्रेरणा का श्रोत हैं। दोस्‍तों हमें प्रताप के Life Journey से सिखना चाहिए।

“यदि मन में जिद्द आ जाय तो हम कुछ भी हासिल कर सकते हैं।”

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प्रताप के रास्‍ते में बहुत सी Problem आई But इन्‍होंने हिम्‍मत नहीं हारी। जब कि आज के Student में Patience Level  बहुत कम हो चुका हैं । वो जल्दि खुद से हार मान लेते हैं और Suicide जैसे कदम उठा लेते हैं।

और बहुत से ऐसे Business men भी होते है,‍ जिन्‍हें थोड़ा बहुत का नुकसान हो जाने पर भी अपने Idea को Drop कर देते हैं। हम चा‍हे जो भी Field में हो, अंत तक कोशिश करना चाहिए जैसे प्रताप ने की।

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आशा करता हूँ आप इस Dron Young Scientist NM Pratap जी के कहानी से बहुत कुछ सीख सकते  हैं। यदि ये  पोस्‍ट आपको अच्‍छी लगी हो तो इस पोस्‍ट को अपने परिवार वालों और दोस्‍तों को Share करना ना भूलें। दोस्‍तों आपके मन में जो भी सुझाव हैं वो हमें Comment Box में जरूर दें…..धन्‍यवाद!

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