बुड़े बनों चाणक्य नीति | Chanakya Niti Hindi Thought and Story

Chanakya Niti Hindi Thought and Story

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”हमें सफल होने के लिए बुरा बनना चाहिए” दोस्‍तो आपने सायद ये बात कही न कही जरूर सुनी होगी। लेकिन हमे ये नहीं समझ नहीं आता की बुरा बनने से सफल कैसे हुआ जा सकता हैं?

बहुत सारे लोग इस कथन का मतलब गलत समझ लेते हैं और दुसरो के साथ बुरा करने लग जाते हैं। जबकि ये गलत हैं।

दोस्‍तों आज मैं इस कथन का Real मतलब समझने वाला हुँ । इसके लिए मैं आपको चाणक्य नीति के एक कहानी (Chanakya Niti Hindi Thought and Story) के माध्‍यम से समझाने की कोशिश करूँगा। so आप इस कहानी को अंत तक पढ़े!

ये कहानी है एक कुम्‍हार की। कुम्‍हार बहुत ही भोला था। सब उसको भोला भोला कहकर बुलाते थे। भोला बहुत ही अच्‍छी अच्‍छी घड़ें बनाता था।

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उसके परिवार में 3 ही सदस्य थे उसकी पत्नी, एक बच्चा और वह खुद। बड़े अच्छे से उसके घर का गुजारा हो रहा था, परंतु एक दिन भोला के हाथ में जबरदस्त चोट लगी और भोला के एक हाथ ने काम करना ही बंद कर दिया।

अब भोला घड़े नहीं बना पाता था और एक हाथ से घड़े बना पाना भी तो संभव नहीं था। इसी कारन से भोला के घर की आमदनी रूक गई। भोला की पत्‍नी को चिन्‍ता सता रही थी की अब परिवार का खर्च कैसे चलेगा?

घर में अन का एक दाना भी नहीं था। अब कोई घड़ा भी नहीं था जिसको बेचकर कुछ ला सके।

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भोला की पत्नी बोली, अब तो कुछ करना ही होगा। आप राजा से मदद मांगीए। आज राजा के घर, पुत्र हुआ है। राजा बहुत खुश होगा। हो सके तो राजा से कुछ कहिए। भोला को बात सही लगी और वो राजा के पास मदद के लिए पहुंच गया।

भोला ने सर झुका कर राजा को सम्मान दिया। राजा बेटा होने की खुशी में पहले ही बहुत खुश था और भोला के इस बात से राजा और भी प्रसन्न होगा।

राजा के दरबार में सबके सामने भोला ने अपना दुखड़ा रोया तो राजा ने कहा-मांग लो, क्या चाहते हो?

अब समस्या यह आ गई की भोला तो भोला था और उसकी पत्नी ने उसे कुछ बताया ही नहीं था कि राजा से मांगना क्या है? तो भोला ने राजा से कहा-आपको जो भी ठीक लगता है, राजा जी आप मेरे को दे दीजिए।

मैं खुशी-खुशी उसे स्वीकार कर लूंगा। राजा ने भोला का जवाब सुनकर और भी खुश हुआ। राजा ने अपने वजीर से कहा- भोला को चार खेत दे दो, भोला खुश हुआ और सोचा चलो कुछ तो मिला राजा से।

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परंतु घर जाकर जब पत्नी को सब कुछ बताया तो पत्नी बोली- जमीन लाये हो तो क्या लाए? हमें कौन सा खेती आती है, जो फसल बेच कर धन कमा लेंगे।

इतना ही नहीं, अब इस बार भी वही हुआ जो हमारे देश में, आज तक होता आ रहा है। राजा ने जमीन तो दे दी परंतु राजा के लोगों ने भोला को नगरी से बाहर सबसे बंजर जमीन दे दी।

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जब भोला की पत्नी को पता लगा कि उनको सबसे बंजर जमीन मिली है तो वो कभी भोला की ओर देखती तो कभी घर में खाली परे बर्तनों की ओर देखती क्योंकि घर में एक भी अन का दाना ना था।

अंत  में भोला की पत्नी ने कहा- चलो कम से कम चल के खेतों की ओर देख तो ले क्या मिला है। जमीन पर पहुंच कर उन्होंने पाया। एक बंजर जमीन का टुकड़ा। जो राजा ने उन्हें चार खेत के नाम पर दिया था। जमीन का एक टुकड़ा बहुत ही बंजर था और जमीन पर बड़े-बड़े पत्थर थे।

ये जमीन नगरी से बहुत दूर थी और भोला की पत्नी को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था की अब बंजर, उबड़-खाबड़ जमीन का क्या करें?

उसी समय पास से कुछ चोर गजर रहे थे। इन लोगों को देखकर भोला की पत्‍नी समझ गई कि वह चोर है।

भोला की पत्‍नी के दिमाग में कुछ आईडिया आया और वो जोर जोर से हसने लगी और भोला से भी ऐसा ही करने को कहा।

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इन दोनों की हंसी सुनकर चोर ध्यान से इनकी बातें सुनने लगे। चोर के सरदार ने भोला की पत्नी से पूछा- इतना खुश हो, क्या कारण है? तो जवाब में भोला ने कहा, कुछ नहीं कुछ नहीं और फिर वह जोर जोर से हसने लगा।

अब चोर को उत्सुकता हुई की आखिर हुआ क्या है? उसने फिर पूछा बताइए ना बात क्या है तो बोला कि पत्नी बोली- देखिए भैया! आपको कसम है  किसी से कुछ कहना नहीं।

चोर ने कसम खाई, किसी से कुछ नहीं कहूंगा! भोला की पत्नी ने बताया उनके पिताजी का कल की निधन हुआ है और मरने से पहले उन्होंने बताया था कि इस धरती में नीचे, उन्‍होने सोने से भरे चार घड़े छुपाए है और मुझे ये नहीं पता की ये घड़े छुपे कहाँ हैं?

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ठिक 4 दिनों बाद हम आएंगे और यहां से सोने से भड़े घड़े को ले जाएगें। और यहां से यह कहकर भोला और उसकी पत्नी घर वापस चले गए। भोला को तो कुछ समझ ही नहीं आया।

4 दिनों बाद भोला और उसकी पत्नी जब वापस आये तो देखा चोरों ने सोने की लालच में पुरा का पुरा खेत जोत दिया था। भोला की पत्‍नी मुस्‍कुराई और भोला  से बोली- मुझे मालुम था की ऐसा जरूर होने वाला है।

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अब हमें यहाँ कुछ गेहुँ के दाने बाजार से लाकर खेत में डाल देने हैं। उसके लिए हमे किसी से कुछ गेेहुँ के दाने उधार लेने होंगे और उन्होंने ऐसा ही किया और कुछ समय बाद खेत में फसल लहराने लगी। इन्‍होंने गेहुँ को बाजार में बेच दिया।

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चोर ने खेतों की ओर देखा। वो समझ गया की उनको मूर्ख बनाया गया है। चोर ने बदला लेने की ठान ली और चोर निकल पड़े इनके घर की तरफ। जैसे ही खिड़की से इनके घर में झाका।

तो भोला की पत्नी ने चोर को देख लिया और वह समझ गई कि उनके साथ क्या होने वाला है। भोला की पत्नी ने भोला से कहा- फसल बेचकर जो पैसे मिले हैं। उसे मैंने मिठाई के डब्‍बे के नीचे छुपा दिया है। ये डब्‍बा रसोई में रखा हुआ हैं।

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यह बात सुनकर चोर बहुत खुश हो गया और मिठाई का डब्‍बा ले कर भाग गया। जब चोर ने इन डब्‍बो को खोला तो पाया डब्बे के ऊपर तो मिठाई है और नीचे तो केवल कचरा ही पड़ा है। कचरा हाथ लगने पर इस बार चोरों ने इन दोनों को जान से मारने की ठान ली और अगली रात ही इन दोने के घर जाने की सोची।

इस बार यह दोनों पहले से ही चौकाने थे और जैसे ही चोरों का सरदार इनके घर की खिड़की पर पहुंचा तो भोला की पत्नी ने एक चाकु से चोर का नाक ही काट दिया। बाकी के चोर भी डर के भाग गए।

चोरों ने समझदारी दिखाई और उन्होंने काफी समय तक कुछ नहीं किया। गर्मियां आई तो चोरों ने देखा भोला और उसकी पत्नी दोनों ही छत पर सो रहे थे। उस समय लोग छतों पर ही सोया करते थे।

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चोर नहीं चारपाई समेत इन दोनों को उठा लिया और चलने लगे। थोड़ी दूर चलने पर इन दोनों की आँखें खुल गई । भोला की पत्नी अच्छे से जानती थी। चोरों से क्षमा मांगने से वह माफ नहीं करेंगे। भोला की पत्नी ने भोला को शांत रहने को कहा।

थोड़ी आगे जाते चोर थक गए। अब उन्होंने चारपाई जमीन पर रखें और थोड़ा आराम करने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठ गये। ये पीपल का पेड़ था। एक तो रात दूसरा थके इतने की उसे नींद आने लगी।

भोला की पत्नी उठी, पहले उसने सोचा। दोनों भाग जाते हैं परंतु फिर उसके मन में आया। क्यों ना चोरो को सबक सिखाया जाए। हमेशा के लिए इनसे पीछा छुड़ाया जाए।

भोला की पत्नी पीपल के पेड़ पर चढ़ गई और जो चादर उसने उसको अपने सिर पर डाल दिया। उस समय यह बात लोगों में मशहूर थी कि पीपल के पेड़ के ऊपर रात को भूत होते हैं। भोला की पत्नी अजीब अजीब से हंसने लगी, जिसको सुनकर की उड़ गई और जो मैंने देखा आवाज कहां पर आ रही है तो उनके पांव के नीचे से जमीन के सकते हैं और चोर भाग निकले।

भोला और उसकी पत्नी अपनी हंसी रोक नहीं पाए।

Moral of the Story

दोस्‍तों आचार्य चाणक्य ने ये कहानी(Chanakya Niti Hindi Thought and Story) के माध्‍यम से सिर्फ इतना ही कहा है कि भोला की तरह भोले मत बनो बल्कि की पत्नी की तरह थोड़ा चालाक बनो, और चालाकी से अपना काम लो

आचार्य चाणक्य कहते हैं, जंगल में सीधे पेड़ सबसे पहले काटे जाते हैं। अगर भोला के साथ उसकी पत्नी ना होती तो भोला! पूरी तरह से बर्बाद हो जाता। इसलिए थोड़ी बहुत चालाकी तो सभी को आनी चाहिए।

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