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ये 8 तरह के लोग, दुसरे के दुखी पर कभी दुख नहीं होते | Chanakya Thoughts in Hindi

Chanakya Thoughts in Hindi

Chanakya Thoughts in Hindi: आचार्य चाणक्य ने जीवन से संबंधित कई सारी महत्वपूर्ण बातें अपने नीति शास्त्र के माध्यम से बताई हैं। उनकी नीतियों को आज भी लोग Follow करते हैं। अगर आप अपने जीवन में चाणक्‍य नीतियों का पालन करते हैं तो जीवन में कभी भी हारेंगे नहीं और कभी भी कठनाईयों का सामना नहीं करना परेगा।

Chanakya Niti की वजह से ही चंद्रगुप्त मौर्य एक बेहतरीन शासक बन पाए थे।

उनके जैसे और भी कई लोग थे जिन्होंने राज पाठ को संभाला था और उनकी नीतियों के बिना कोई भी कदम नहीं उठाते थे। जबकि, आज के समय में लोगों के पास इन सभी महत्‍वपूर्ण बातों के लिए समय ही नहीं है और न ही वो इनके बारे में सोचना चाहते हैं लेकिन वो ये नहीं समझते कि जीवन की असली सच्चाई उनकी नीतियों में ही निहित है। जिससे वो पालन करके अपने जीवन में सफलता हासिल कर सकते हैं।

ऐसे बहुत कम लोग ही होते हैं, जो दूसरों के दुख में सच में दुखी होते हैं और सामने वाले को सहानुभूति देते हैं, क्योंकि जिन लोगों के मन में किसी और के लिए दुख या पीड़ा की भावना नहीं होती, वह कभी भी किसी का दुख नहीं समझ सकते हैं, इसलिए अच्छा यही होगा कि आप ऐसे लोग के सामने अपना दुख भूलकर भी प्रकट ना करें। ये 4 बातें ही तय करती हैं कि आपको सफलता मिलेगी या नहीं 

Chanakya Thoughts in Hindi: आचार्य चाणक्य ने अपने नीति संग्रह के एक श्लोक में 8 ऐसे प्राणियों के बारे में वर्णन किया है जिन पर किसी भी दूसरे व्यक्ति के दुख का कोई भी असर ही नहीं होता है। यदि आप इन लोगों के बारे में जान गये तो आपको जीवन जीने में आसानी होगी और खुद को दुखी होने से बचा सकते है।
तो चलिए जानते हैं उन 8 लोगों के बारें में….कौन हैं ये 8 तरह के लोग!

Chanakya Thoughts in Hindi
ये 8 तरह के लोग, दुसरे के दुखी पर कभी दुख नहीं होते!

राजा वेश्या यमो ह्यग्निस्तकरो बालयाचको।
पर दु:खं न जानन्ति अष्टमो ग्रामकंटका:।।

Chanakya Thoughts in Hindi: चाणक्य इस श्लोक के माध्यम से कहते हैं कि… राजा, वेश्‍या, यमराज, अग्नि, चोर, बालक, याचक और कांटा यह 8 तरह के लोग कभी भी किसी की भावनाओं को नहीं समझ सकते हैं। यही नहीं, इन्हें किसी के भी दुख की कोई चिंता नहीं होती है औऱ ना ही इन्‍हें कोई ज्यादा फिक्र करते हैं, इसलिए इनके सामने अपना दुखड़ा रोने से कोई फायदा नहीं हैं।

1. राजा या शासक (King)

राजा यानी शासन व्यवस्था को कभी भी किसी व्यक्ति के दुख से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वो कानून के नियमों में बंधा होता है जिसके वजह से वो राजा अपने उपर लोगों के दुख और भावनाओं को हावी नहीं होने देता। तभी तो राज्‍य में इतनी समस्‍या होने पर भी राजा कुछ नहीं कर पाता क्‍योंकि जो भी समाधान होगा वो समय पर ही करेगा। इसका एक ही वजह हैं राजा अपने कानून और नियमों से बधा होता हैं।

राजा जहां सत्य और अपने नियम को ही ध्यान में रखकर न्याय करता है, इसलिए वह किसी का भी दुख नहीं समझ सकता है।

2. वेश्‍या (whore)

चाणक्य इस श्लोक में कहते हैं, वेश्या को केवल अपने काम से मतलब होता है, उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि दूसरा व्यक्ति कितना दुखी है या उसकी पीड़ा कितनी है। वेश्‍या को केवल धन चाहिए होता हैं इसलिए धन के लिए कुछ भी कर सकती हैं। जिसके वजह से वह किसी के दुख से दुखी नहीं होती ।

3. यमराज (Yama)

यमराज के बारे में चाणक्य कहते हैं कि, यमराज पर भी लोगों के दुख का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। वो समय आने पर उनके प्राण ले ही लेते हैं चाहें परिवार वालों को कितना भी कष्‍ट क्‍यों ना हो। अगर वो सबके दुखों को समझने लगेंगे तो किसी की मौत ही नहीं होगी और किसी का प्राण ही नहीं ले पायेगा। यमराज का काम ही हैं लोगों का प्राण लेना जिसके वजह से उसपर किसी के दुखों का असर नहीं होता।

4. अग्नि (Fire)

अग्नि जड़ पदार्थ है, वह तो किसी के दुख-दर्द को जान ही नहीं सकता। आग की प्रवृति ही होती हैं सबकुछ जला डालने की। अग्नि मनुष्य के दुख-दर्द से बेपरवाह होती है, इसलिए अग्नि को मनुष्य के दुख से कोई वास्ता नहीं होता, वो बस सब कुछ जला देना चाहती है। उसे किसी के दुख-दर्द से कोई मतलब नहीं होता।

5. चोर (Thief)

आचार्य कहते हैं कि चोर को चोरी करने से मतलब होता हैं। चोर भी किसी के दुख को नहीं समझता। वो जो करने आता है उसे किए बिना वापस नहीं लौटता चाहे उस चोरी से किसी को भी कितनी ही परेशानी क्यों न हो। चोर कभी नहीं सोचता कि मेरे चोरी करने से किसी को इतना नुकसान हो सकता हैं। इसलिए वो हमेशा चोरी को अंजाम देता हैं। आप चोर से हमेशा सर्तक रहें।

6. बच्‍चें (Child)

आचार्य चाणक्‍य इस श्‍लोक में बच्‍चों को भी समील किये हैं। वो कहते हैं कि बच्‍चों को भी किसी की परेशानी या दुख से कोई मतलब नहीं होता। वो नादान और ना समझ होते हैं इसीलिए किसी की भावनाओं को समझ नहीं पाते। चाणक्‍य कहते हैं कि कभी भी बच्‍चों के सामने अपना दुख प्रकट ना करें और कभी भी दुख का रोना ना रोये क्‍योंकि बच्‍चें कभी भी आपके दुख को समझ ही नहीं सकते।

7. याचक/ भिक्षु (Beggar)

याचक यानी मांगने वालों को भी कोई फर्क नहीं पड़ता कि सामने वाला कितना दुखी है वो बस वही करता है जिसके लिए वो आया है। भिक्षु केवल अपना स्‍वार्थ ही सोचता हैं जिसके वजह से दुसरे के दुखी से उसे कोई फर्क नहीं परता।

8. ग्रामकंटक

ग्रामकंटक यानी गांव के लोगों को परेशान करने वाले लोगों पर भी किसी दूसरे के दुख का असर नहीं होता। वो किसी भी रूप में लोगों को परेशान करते हैं। गाव में कुछ ऐसे लोग होते हैं जिसका काम ही हैं गाव के लोगो को दुख पहुचाना और परेशान करना। ऐसे लोगों से हमेशा दुर रहना ही चाहिए।

 

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