Inspirational hindi Story on Dedication: हर बार दें अपना बेस्ट, तभी सफलता मिलेगी

Inspirational hindi Story on Dedication

Inspirational hindi Story on Dedication: दोस्‍तों! कई बार हमलोग के साथ अक्सर ऐसा होता हैं कि एक ही जैसे काम को बार बार करते हुए बोरियत या ऊबन सा लगने लगता हैं। काम करना जरूरी है, इसलिए उसे जैसे-तैसे बस खत्म करने के बारे में सोचते हैं या खत्‍म कर देते हैं।

मगर ऐसा करते हुए हम यह नहीं समझ पाते हैं कि हम भले बेमन से काम कर रहे हैं, लेकिन समय तो पूरा ही दे रहे हैं। दूसरी बात बेमन से काम करके हम अपने Profession के साथ भी तो नाइंसाफी कर रहे हैं।

हमें जो काम करने के लिए सौंपा गया है, वो हमारी विशेषज्ञता को ध्यान में रखते हुए सौंपा गया है। इस लिए काम से जी चुराना मतलब अपनी काबीलियत को कम करना है। इससे अच्‍छा ये हैं कि जब काम करने का जी न करे, तो उसे करने से इनकार कर देंना चाहिए।

यही बात आज हम इस कहानी के माध्‍यम से समझने कि कोशिश करते हैं।

तो चलिए शुरू करते हैं ये कहानी:-

Inspirational hindi Story on Dedication

एक कारीगर बहुत सालों से एक Construction company के साथ मकान बनाने का काम करता था। लेकिन अब वह बहुत बुढ़ा हो चला था और उससे मकान बनाने का मेहनत भरा काम नहीं हो पाता था।

इसलिए उसने अपने काम से हमेशा के लिए अलग होने का मन बनाया ताकि अपनी बची हुई थोड़ी बहुत जिंदगी वह अपने परिवार वालों के साथ व्यतीत कर सके। वह अपने मालिक के पास गया और Retire होने के फैसले के बारे में बताया।

उसकी बात सुनकर मालिक को मन ही मन बहुत दुख हुआ क्योंकि वह बहुत ही ईमानदार और अनुभवी कारीगर था। लेकिन फिर भी मालिक ने उससे कहा, ‘ठीक है। मैं आपकी परेशानी समझ सकता हूँ।

 क्या आप Retire होने से पहले एक आखिरी मकान बनाएंगे?

अपने मालिक का मान रखते हुए उसने अंतिम मकान बनाने के लिए अपनी सहमति दे दिया। वह जल्दी से जल्दी उस मकान को बनाकर काम खत्म कर देना चाहता था इसलिए उसने कई Shortcut तरीके अपनाए और अधूरे प्रयास करते हुए बे-मन से उस मकान को जल्द से जल्द बनाकर तैयार करने का फैसला किया।

जिस वजह से उसने उस घर का बनाने में ज्‍यादा मेहनत नहीं की। जिसके कारन वो उस घर में सस्‍ते सस्‍ते सामान लगवाये, साधारण-साधारण से काम करवाया। कहने का मतलब ये कि उसने अपना पुरा 100% नहीं दिया उस घर को बनाने में।

Finally वो कारिगर उस घर को कुछ ही महीनों में ही Complete कर दिया।

जब मकान बनकर तैयार हो गया, तो मालिक उस मकान का मुआयना करने आया और उसी बुढ़े कारीगर के हाथ में उस मकान की चाबी देते हुए कहा, यह मेरी तरफ से आपका Retirement gift है।

वह कारीगर Socked रह गया। उसे अपने बनाए आखिरी मकान के प्रति यह सोचकर अफसोस हुआ कि कितना बेहतर होता अगर मैं इस मकान को भी उतने ही उत्साह व लगन के साथ बनाता, जितने आज से पहले तक बनाए थे।

Moral of the story:-

दोस्‍तों! ये छोटी सी कारीगर की कहानी (Inspirational hindi Story on Dedication) हमें बहुत ही अच्‍छी बात सीखाती हैं कि काम चाहे पहला हो या आखिरी, यदि आपने उसे स्वीकार किया है तो उसे पूरे मन से करना चाहिए। अगर कोई काम मन से न कर पये, तो उसे उसी वक्‍त मना कर दें।

किसी काम को करना स्वीकार करते हैं, तो उसमें हमेशा अपना Best देने की कोशिश करें। जिस काम में मन नहीं लगे, उसे बेमन से करने से बेहतर है कि उस काम को अस्‍वीकार कर दिया जाए।

आप खुद ही सोच कर देखें यदि वो कारीगर मन से उस घर में काम करता तो शायद उसे ही अच्‍छा घर मिलता लेकिन जल्‍दी के चक्‍कर में अपना घर ही खराब बना लिया।

इसलिए दोस्‍तों! हर काम को करने में अपना Best देने का कोशिश करें।

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