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खुद को Motivate कैसे रखें | Motivational Story on Self Motivation

 

Motivational Story on Self Motivation

कई बार हम खुद की दूसरे से तुलना करके अपने अंदर हीन भावना को जन्म देते हैं जो अंदर ही अंदर हमें खोखला करने लगती है साथ ही हम खुद को कमजोर समझने लगते हैं।

Motivational Story on Self Motivation: हम अपने गुणों से ज्यादा अपने अवगुणों पर ध्यान देने लगते हैं और गुणों को देख ही नहीं पाते। एक समय आता है कि हम सोचने लगते हैं कि हमारा जीवन तो व्यर्थ ही है, लेकिन ऐसा नहीं है। हर व्यक्ति का अपना गुण है, उसका अपना एक महत्व है। दूसरे से तुलना करके अपने महत्व को खत्म होने ना दें और खुद को कमजोर ना समझें।

चलिए इसे एक कहानी के माध्‍यम से समझते हैं…

Motivational Story on Self Motivation
गुलाब के पत्ते की कहानी

ये कहानी हैं गुलाब के एक पत्ते की…

एक समय की बात है। एक सरोवर के तट पर एक बगीचा था। इसमें तमाम तरह के गुलाब के पौधे थे। लोग वहां आते, तो वे वहां खिले गुलाब के फूलों की तारीफ करते। एक बार एक बहुत सुंदर गुलाब के पौधे के एक पत्ते के भीतर यह विचार आया कि सभी लोग फूल की ही तारीफ करते हैं, पत्ते की कोई तारीफ नहीं करता।

इसका मतलब है कि मेरा जीवन व्यर्थ है। पत्ते के अंदर हीन भावना घर करने लगी और वह मुरझाने लगा।

एक दिन बहुत तेज तूफान आया। जितने भी फूल थे, वे पंखुड़ी-पंखुड़ी होकर हवा के साथ न जाने कहां चले गए। चूंकि पत्ता अपनी हीन भावना से मुरझा कर कमजोर पड़ गया था, इसलिए वह भी टूटकर, उड़कर सरोवर में जा पड़ा।

पत्ते ने देखा कि सरोवर में एक चींटी भी आकर गिर पड़ी थी और वह अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी।

चींटी को थकान कि वजह से हिम्‍म्‍त हारते देख, पत्ता उसके पास आ गया और उससे कहा-घबराओ मत, तुम मेरी पीठ पर बैठ जाओ और मैं तुम्‍हें किनारे तक ले जाउँगा।

चींटी पत्ते पर बैठ गई और सही-सलामत किनारे तक आ गई। चींटी इतनी कृतज्ञ हो गई कि पत्ते की तारीफ करने लगी।

उसने कहा – मुझे तमाम पंखुडि़यां मिलीं, लेकिन किसी ने भी मेरी मदद नहीं की, लेकिन तुमने तो मेरी जान ही बचा ली। तुम बहुत ही महान हो।

यह सुनकर पत्ते की आंखों में आंसू आ गए।

वह बोला- धन्यवाद तो मुझे देना चाहिए कि तुम्हारी वजह से मैं अपने गुणों को जान सका। अभी तक तो मैं अपने अवगुणों के बारे में ही सोच रहा था, लेकिन आज अपने गुणों को पहचानने का अवसर मिला।

Moral of The Story

– किसी से तुलना करके खुद में हीन भावना पैदा करने के बजाय सक्रिय होकर अपने भीतर के गुणों को पहचानना चाहिए।

– यदि आप दुसरों को महंगा कहोगों तो आप सस्‍ते हो जाओगे।

– यदि तुलना करना ही हैं तो दुसरो के वजाय खुद से करों। ये सोचो कि आप एक साल पहले क्‍या थे और आज क्‍या हों।

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