बुरे समय में घबड़ाये नहीं | Story on Success in hindi

बुरे समय में घबड़ाये नहीं
Story on Success in Hindi

Story on Success in Hindi

दोस्‍तों Life में कभी कभी ऐसा होता हैं जब हम सोचते कुछ और हैं और हो कुछ और ही जाता हैं। उस समय हम समझ नहीं पाते हैं कि मेरे साथ ही ऐसा क्‍यों हुआ। शायद आपके जिंदगी में ऐसे कई पल आए हुए होगें।

ऐसे परिस्थिती में हमें ज्‍यादा नहीं सोचना चाहिए। But मैं कितना भी आपको कह दूँ ज‍बकि मेरे साथ भी ऐसा ही होता हैं। ना चाहते हुए भी मन सोचता ही हैं और सोच सोच कर परेशान होता हैं।

इस Case में मैं क्‍या करता हूँ वो बताना चाहता हूँ जिससे आपको कुछ Help हो सके।

जब मेरे सोच से विपरित होता हैं तो मैं उस Situation को समय पर छोड़ देता हूँ, समय एक ऐसा दवा हैं जो हर problem को Solve कर देता हैं।

और आप Believe नहीं मानेंगे कुछ दिन के बाद ओ Problem अपने आप ठिक हो जाता हैं।

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चलिए इस चीज को एक कहानी के माध्‍यम से समझते हैं मुझे विश्‍वास हैं ये कहानी पढ़ने के बाद आपको अच्‍छे से समझ में आ जाएगा।

तो चलिए शुरू करते हैं:-

4 घड़ों की कहानी जो आपके सोच की दिशा बदलेगी!

बहुत पुरानी बात है, किसी गांव में एक कुम्‍हार रहता था। वह बहुत अच्‍छे और सुन्‍दर मिट्टी के बर्तन बनाता था।

ठंडी के मौसम चल रही थी, एक बार बर्तन बनाते समय उसने चार घड़े बनाये। वह घड़े बहुत ही सुन्‍दर और बड़े थे। इतना सुन्‍दर और बड़ा होने के बाद भी कुम्‍हार के सभी तरह के बर्तन तो बिक रहे थे लेकिन उन चार घड़ों का कोई खरीदार ही नहीं मिल रहा था।

Story on Success in Hindiघड़ा क्‍या होते हैं wikipedia से जाने

इस बात को लेकर चारों घड़े बहुत दुखी रहते थे। काफी दिनों तक न बिकने की वजह से वे चारों खुद को बेकार और बिना किसी काम का समझने लगे थे।

एक दिन वह चारों घड़े अकेले रह गए थे। अकेलेपन को मिटाने के लिए चारों घड़े आपस में बात करने लगे।

पहला घड़ा बोला:-

मैं तो एक बहुत बड़ी और सुन्‍दर मुर्ति बनना चाहता था ताकि किसी अमीर के घर की शोभा बढ़ाता। लोग मुझे देखते और मैं गर्व महसूस करता लेकिन देखो!

Story on Success in Hindi Story on Success in hindi

मैं तो एक घड़ा ही बन कर रह गया जिसे आजकल कोई नहीं पूछता हैं।

तभी दुसरे घड़ा बोला:-

किस्‍मत तो मेरी भी खराब हैं। मैं तो एक दीया बनना चाहता था ताकि लोगों के घरों में रोज जलता और चारों ओर प्रत्‍येक दिन रोशनी ही रोशनी बिखेरता।

Story on Success in Hindi 2

लेकिन देखों! क्‍या किस्मत हैं, केवल एक घड़ा बनकर रह गया।

तभी तीसरे घड़े को न रूका गया और उसने भी अपनी परेशानी बतानी शुरू की।

फिर तीसरे घड़े ने बोला :-

किस्‍मत तो मेरी भी खराब हैं। मुझे पैसों से बहु‍त प्‍यार हैं, इसी कारण मैं एक गुल्‍लक बनना चाहता था।

अगर मैं गुल्‍लक होता तो लोग मुझे खुशी से ले जाते और मुझे हमेशा पैसों से भरा रखते लेकिन वाह रे मेरी किस्‍मत मैं तो केवल एक घड़ा ही बनकर रह गया।

Story on Success in Hindi 1Story on Success in hindi

अपनी अपनी बात कहने के बाद तीनों घड़े उस चौथे घड़े की तरफ देखने लगे। चौथा घड़ा तीनों को देखकर मुस्‍कुरा रहा था।

तीनों घड़ों को चौथे घड़े का यह व्‍यवहार अच्‍छा न लगा और बोले, क्‍या बात है भाई! क्‍या आपको घड़ा बनने का कोई दु:ख नहीं हैं। क्‍या आप खुश हैं जबकि तीन महीने हो गए, आपका कोई खरीदार नहीं मिला हैं।

इस बात पर

चौथा घड़ा मुस्‍कुराया और बोला:-

आप तीनों क्‍या समझते हो, क्‍या मैं दुखी नहीं हूँ?

मैं तो एक खिलौना बनना चाहता था ताकि जब बच्‍चे मुझसे खेलते तो बहुत खुश हो और उनकी प्‍यारी सी हंसी और खुशी को देखकर मैं भी खुशी होता लेकिन कोई बात नहीं।

हम एक उद्देश्‍य में असफल हो गए तो क्‍या। दुनिया में अवसरों की कोई कमी नहीं हैं। “एक गया तो आगे और भी अवसर मिलेंगे। बस धैर्य रखो और सही समय का इंतजार करो।”

बस फिर क्‍या था, बाकि तीनों घड़ों के मन में भी खुशी छा गयी। बस एक महीना और बीता ही था तो ग्रीष्‍म ऋतु(गर्मी के महीने)  की शुरूआत हो चुकी थी। अब लोगों को ठन्‍डे पानी की जरूरत महसुस होने लगी थी।

लोगों ने घड़े खरीदने शुरू कर दिए। चारों घड़े बड़े और सुन्‍दर तो थे ही। लोगों ने जैसे ही उन्‍हें देखा, तुरंत ऊँचे दामों में उन्‍हें खरीद लिया।

आज वह घड़े सैकड़ों लोगों की प्‍यास बुझाते हैं और बदले में खुशी और दुआएं पाते हैं।

Moral of the Story on Success in hindi:-

इस कहानी से हमें जीवन के लिए बहुत कुछ अच्‍छा सीखने को मिलता हैं।

दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जो वह नहीं बन पाते जो वह बनना चाहते थे। ऐसा होने पर लोग खुद को असफल महसुस करते हैं और हमेशा अपनी किस्‍मत को दोष देते रहते है।

कुछ लोग एक उद्देश्‍य रखते हैं और उसे पाने के लिए पुर्ण प्रयास भी करते हैं। जब असफलता हाथ लगती है तो अपनी किस्‍मत को कोसते हैं और पूरा दोष दुसरों को देते हैं।

ध्‍यान देने वाली बात यह हैं कि क्‍या हुआ हम अपने पहले उद्देश्‍य में असफल हो गए। क्‍या हुआ जब हमने एक मौका गवां दिया।

यदि ऐसा हो तो कभी खुद को असफल नहीं मानना चाहिए। एक अवसर चला गया तो क्‍या हुआ, दुसरा अवसर आपकी राह देख रहा हैं।

यदि असफलता मिल रही है तो घबराने की जरूरत नहीं हैं, खुद पर विश्‍वास रखो।

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आशा करता हूँ दोस्‍तों  इस Story on Success in hindi कहानी के माध्‍यम से बाते समझ में आ गई होगी और कहानी भी अच्‍छी लगी होगी। इस story को अपने दोस्‍तों और परिवार वालों के साथ Share करें। यदि आपके पास भी अच्‍छी सी motivational Inspiring Story हैं तों हमें Contact us में जाकर हमें Story भेजें। आपकी Story अच्‍छी रही तो हम आपके Photos के साथ अपने Blog में Post करेंगें। और आप अपना सुझाव हमें देना ना भुले….धन्‍यवाद!

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