Swami Vivekananda story in hindi on Success | हिम्‍मत ना हारे

Swami Vivekananda story in hindi on SuccessSwami Vivekananda story in hindi on Success

Swami Vivekananda का बहुत लोकप्रिय कथन है उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक अपने लक्ष्य को न प्राप्त कर लो। इस बात से प्रेरणा लेने की जगह कई बार लोग एक-दो बार असफल होने के बाद कोशिश करना ही छोड़ देते हैं। उन्‍हें लगता हैं कि ये मेरे बस कि बात ही नहीं हैं और अपने लक्ष्य को पाने के लिए किए जाने वाले प्रयासों को छोड़कर ही बैठ जाते हैं।

ठिक इसके विपरीत अगर हम अपनी कोशिशें करते रहे तो हमें सफल होने से कोई भी नहीं रोक सकता है! चलिए इसे एक कहानी के माध्‍यम से समझते हैं:-

Swami Vivekananda story in hindi on Success
बार बार को‍शिश करने वालों को ही
मिलती हैं सफलता !

एक प्रयोग में एक Research Biologist ने एक बड़े से टैंक में शार्क मछली को रखा और फिर उसी टैंक में छोटी मछलियों को भी डाल दिया गया। थोरी देर के बाद, शार्क ने छोटी मछलियों को खाना शुरू कर दिया और कुछ ही घंटों में सभी छोटी मछलियां शार्क का आहार बन चुकी थीं।

जब जब शार्क और छोटी मछली को एक साथ, एक टैंक में रखा गया तो हर बार शार्क मछली, छोटी मछली को अपना आहार बना लेती थी।  

Biologist ने अब अपने प्रयोग में थोड़ा सा Change किया और एक मजबूत Fiber slide(गलास कि मोटी परत) को उस टैंक में डाल कर टैंक को दो भागों में बांट दिया।

एक भाग में शार्क मछली और दूसरे भाग में छोटी मछलियों को रखा गया। आदत के वजह से शार्क मछली ने छोटी मछलियों पर हमला करना चाहा तो वे उस Slide से टकरा गईं।

शार्क को समझ में नहीं आया कि ये क्‍या हुआ। शार्क ने फिर से कोशिश किया लेकिन वो फिर से Slide से टकरा गई। शार्क ने कोशिश नहीं छोड़ा और हमला करती रही।

Swami Vivekananda story in hindi on Success

इस प्रयोग को कुछ हफ्तों तक जारी रखा गया। इस प्रयोग में यह देखा गया कि शार्क ने बार बार हमला करना जारी रखा, लेकिन उसके प्रयास में लगातार कमी आती गई। फिर एक समय ऐसा आया कि शार्क ने यह मान लिया कि वह छोटी मछलियों को नहीं खा सकता जिसके वजह से शार्क ने कोशिश करना ही छोड़ दिया।

कुछ हफ्तों के बाद, Biologist ने अब Fiber की Slide को टैंक से हटा दिया। लेकिन यह क्या, शार्क को तो इससे कोई फर्क हीं नहीं पड़ा। उसने यह मान लिया था कि वह एक दीवार है, मतलब एक अवरोध है, जिसे वह पार नहीं कर सकती।

जिसके वजह से उसने प्रयास करना ही छोड़ दिया अब छोटी मछलियां आराम से उसी टैंक में तैर रहीं थी और उसे शार्क से कोई खतरा भी नहीं था। अब शार्क ने छोटी मछ‍ली पर हमला नहीं कर रहा था।

Moral of The Story:-

दोस्‍तों! हममें से कई लोगों के साथ अक्सर ऐसा ही होता है। लगातार असफल होने  के बाद भी हम कोशिश करना ही छोड़ देते हैं।

यदि हमारे लक्ष्‍य को पाने के दौरान कोई रुकावट आती हैं तो हमें ऐसा लगता है कि अवरोध है, जिसे पार नहीं किया जा सकता। ये सोच कर हम बाद में कोशिश करना छोड़ देते हैं और खुद से हिम्‍मत हार जाते हैं।

लेकिन Real में वो काम अब आसान हो चुका हैं फिर भी हम एक बार भी हिम्‍मत नहीं करते उस काम को करने के लिए। इसके एक ही वजह हैं, हमारे दिमाग में पुरानी बात का बैठ जाना और फिर से दुबारा कोशिश ना करना।

Believe मानिए मेरा, अगर किसी चीज को पाने के लिए हम ईमानदारी से लगातार प्रयास करते रहे, तो वह हमें जरूर मिलती है और हम अपने लक्ष्‍य को हासिल भी कर लेते हैं।

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